मेलूहा के मृत्युंजय समीक्षा: Amish के शिव और पौराणिक कथा की नई कल्पना || मेलूहा के मृत्युंजय Book Review: कहानी, पात्र, सोमरस और सूर्यवंशी-चंद्रवंशी संघर्ष || मेलूहा के मृत्युंजय की समीक्षा: क्या शिव की यह नई कहानी आपको पढ़नी चाहिए? ||
पुस्तक समीक्षा :- “मेलूहा के मृत्युंजय ” – अमीश त्रिपाठी मेलूहा के मृत्युंजय: जब शिव भगवान बनने से पहले एक इंसान की तरह सवाल करते हैं पुस्तक: मेलूहा के मृत्युंजय लेखक: Amish मूल पुस्तक: The Immortals of Meluha श्रृंखला: शिव रचना त्रय – प्रथम पुस्तक विधा :- Mythological Fiction 1. भूमिका मेरे लिए मेलूहा के मृत्युंजय की सबसे दिलचस्प बात यह नहीं है कि इसमें भगवान शिव को मुख्य पात्र बनाया गया है। असली दिलचस्पी इस बात में है कि Amish ने शिव को शुरुआत में भगवान की तरह नहीं , बल्कि एक साधारण इंसान की तरह प्रस्तुत किया है—जो गुस्सा करता है , प्रेम करता है , गलतियाँ करता है , दोस्ती निभाता है और सबसे महत्वपूर्ण , सवाल करता है। किताब का मूल विचार ही बहुत रोचक है—क्या जिन्हें हम आज देवता मानते हैं , वे कभी ऐतिहासिक समय में जीने वाले मनुष्य रहे होंगे और अपने कर्मों के कारण देवत्व तक पहुँचे होंगे ? लेखक स्वयं इस कल्पना को किताब की भूमिका में सामने रखते हैं। यहीं से यह किताब मेरे लिए केवल पौराणिक कथा नहीं रह जाती। यह एक तरह का सवाल बन ...