शांत रस किसे कहते है । शांत रस की परिभाषा । रस , अर्थ , परिभाषा , अंग , भेद या प्रकार , । हिंदी व्याकरण
9. शांत रस- जब किसी सहृदय के हृदय में निर्वेद नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो शांत रस की उत्पत्ति होती है। अथवा जहां पर काव्य वर्णन में ऐसा प्रतीत हो कि संसार में मन नही लग रहा या वैराग्य भाव को दिखाने वाला रस , शांत रस कहलाता है। उदाहरण- 1. मेरो मन अनंत कहाँ सुख पावै, जैसे उड़ी जहाज को पंछी फिरि जहाज पे आवै। 2. मन रे तन कागद का पुतला। लागै बूंद बिनसि जाए छिन में,गरब करे क्या इतना।। डाउनलोड पीडीएफ ____________________________________ रस की परिभाषा .....................................