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Showing posts from January, 2021

शांत रस किसे कहते है । शांत रस की परिभाषा । रस , अर्थ , परिभाषा , अंग , भेद या प्रकार , । हिंदी व्याकरण

9. शांत रस- जब किसी सहृदय के हृदय में निर्वेद नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो शांत रस की उत्पत्ति होती है।                           अथवा जहां पर काव्य वर्णन में ऐसा प्रतीत हो कि संसार में मन नही लग रहा या वैराग्य भाव को दिखाने वाला रस ,   शांत रस कहलाता है। उदाहरण- 1. मेरो मन अनंत कहाँ सुख पावै,                   जैसे उड़ी जहाज को पंछी                     फिरि जहाज पे आवै।                2. मन रे तन कागद का पुतला। लागै बूंद बिनसि जाए छिन में,गरब करे क्या इतना।। डाउनलोड पीडीएफ ____________________________________ रस की परिभाषा .....................................

वीभत्स रस किसे कहते है। वीभत्स रस की परिभाषा। रस , अर्थ , अंग , भेद या प्रकार , । हिंदी व्याकरण।

8. वीभत्स रस- जब किसी सहृदय के हृदय में जुगुप्सा नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो वीभत्स रस की उत्पत्ति होती है।                           अथवा जहां पर काव्य में घृणा या जुगुप्सा का भाव प्रतीत होता है वहां पर वीभत्स रस   होता है । उदाहरण- 1. सिर पर बैठ्यो काग,                   आंख दोउ खात निकारत।                   मुंह में जिह्वा लार,                   अति आनंद उर धारत।     2.   जा दिन मन पंछी उड़ि जैहै। ता दिन में तनकै विष्ठा कृमि के ह्वैं खाक उड़ेहै। डाउनलोड पीडीएफ _______________________________ .........................................

भयानक रस किसे कहते है। भयानक रस की परिभाषा। रस , अर्थ , परिभाषा , अंग , भेद या प्रकार , । हिंदी व्याकरण

7. भयानक रस- जब किसी सहृदय के हृदय में भय नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो भयानक रस की उत्पत्ति होती है।                        अथवा इस रस के अनुसार जब किसी बलवान व्यक्ति या भयानक वस्तु को देखकर भय का भाव उत्त्पन्न होता है,तो वहां भयानक रस होता है। उदाहरण- 1. एक ओर अजगरहिं लखि,                   एक ओर मृगराय।                   विकल बटोही बीच में,                   परयो मूरछा खाय।    2. बालधी विशाल, विकराल, ज्वाला-जाल मानौ,        लंक लीलिबे को काल रसना परारी है।    3.    कैदियों व्योम बीद्यिका भरे हैं भूरिम्प...

अद्भुत रस किसे कहते है । अद्भुत रस की परिभाषा । रस , अर्थ , अंग , भेद या प्रकार , । हिंदी व्याकरण

6. अद्भुत रस- जब किसी सहृदय के हृदय में विस्मय नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो अद्भुत रस की उत्पत्ति होती है।                             अथवा जहां पर काव्य के वर्णन में विस्मय या आश्चर्य का भाव प्रतीत होता है , वहां  अद्भुत रस होता है। उदाहरण- 1 . सारी बीच नारी है,की नारी बीच सारी है।              सारी ही कि नारी है, की नारी ही कि सारी है।                2. बिनु पग चले,सुनै बिनु काना।                   कर बिन करम, करै विधि नाना।                   आनन रहित, सकल रस भोगी।     ...

रौद्र रस किसे कहते है । रौद्र रस की परिभाषा । रस , अर्थ , अंग , भेद या प्रकार , । हिंदी व्याकरण

5. रौद्र रस- जब किसी सहृदय के हृदय में क्रोध नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो रौद्र रस की उत्पत्ति होती है।                          अथवा जहां पर काव्य में क्रोध या गुस्सा के भाव का बोध हो ,तो वहां पर रौद्र रस होता है। उदाहरण-  1.   श्री कृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्रोध से जलने लगे      सब शोक अपना भूलकर करतल युगल मलने लगे       संसार देखे अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े ।      करते हुए घोषणा भी हो गए उठकर खड़े। 2. माखे लखन कुटिल भयीं भौंहें।     रद-पट फरकत नयन रिसौहैं।।     कहि न सकत रघुबीर डर, लगे वचन जनु बान।     नाइ राम-पद-कमल-जुग, बोले गिरा प्रमान। डाउनलोड पीडीएफ _____________________________ .................................................. .........................................

वीर रस किसे कहते है । वीर रस की परिभाषा । रस , अर्थ ,परिभाषा , अंग , भेद या प्रकार , । हिंदी व्याकरण

4. वीर रस- जब किसी सहृदय के हृदय में उत्साह नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो वीर रस की उत्पत्ति होती है।                          अथवा अर्थात जहां पर विषय वर्णन में वीरता , उत्साहकरिता , तेज प्रताप के भाव का बोध हो तो वहां पर वीर रस होता है। उदाहरण-  1. . बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी ।      खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी।। 2. वह खून कहो किस मतलब का     जिसमें उबाल का नाम नहीं ।     वह खून कहो किस मतलब का      आ सके देश के काम नहीं । डाउनलोड पीडीएफ .................................................. download pdf करुण रस ........................................... रस की परिभाषा ............................................ रस के अंग ............................................ Download pdf (रस के अंग). .........

हास्य रस किसे कहते है। हास्य रस की परिभाषा । रस , अर्थ , परिभाषा ,अंग , भेद या प्रकार , समस्त रसों की परिभाषाएं एवम हिंदी व्याकरण

3. हास्य रस- जब किसी सहृदय के हृदय में हास नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो हास्य रस की उत्पत्ति होती है।                            अथवा अर्थात हास्य रस मनोरंजक रस है। जहां पर काव्य में  ऐसा भाव प्रदर्शित हो जहां पर उसको पढ़ने से आपका मन प्रफुल्लित हो उठे या आप मनमुग्ध हो जाये तो वहां पर हास्य रस होता है। उदाहरण-    1..  फादर ने सिलवा दिए तीन को छः पेंट ,      बेटा मेरा बन गया कॉलेज स्टूडेंट । 2.   बंदर ने कहा बंदरिया से चलो नहाए गंगा ।      बच्चों को छोड़ेंगे घर में होने दो हुड़दंगा । 3.   तंबूरा ले मंच पर बैठे प्रेम प्रताप,      साज मिले पंद्रह मिनट घंटा भर आलाप ।     घंटा भर आलाप राग में मारा गोता ,     धीरे-धीरे खिसक चुके थे सारे श्रोता । 4.  पत्नी खटिया पर पड़ी , व्...

करुण रस किसे कहते है | करुण रस की परिभाषा। रस, अर्थ , परिभाषा ,अंग , भेद या प्रकार , हिंदी व्याकरण।

2. करुण रस- जब किसी सहृदय के हृदय में शोक नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो करुण रस की उत्पत्ति होती है।                             अथवा अर्थात जहां पर काव्य में किसी हानि के कारण शोक , दुख आदि का भाव प्रदर्शित होता है वहां पर करुण रस होता है। उदाहरण-  1.. सोक विकल सब रोवहिं रानी,       रूप सीलु बनु तेज बखानी।      करहिं विलाप अनेक प्रकारा,      परिहिं भूमि तल बारहिं बारा।। 2.   अभी तो मुकुट ने माथ,       कल कल ही हल्दी के हाथ,       खुले भी न थे लाज के बोल,      खिले थे चुम्बन-शून्य कपोल,       हाय रुक गया यहीं संसार,      बना सिन्दूर अनल अंगार । download pdf करुण रस .....................

श्रृंगार रस किसे कहते है । श्रृंगार रस की परिभाषा। रस , अर्थ , परिभाषा ,अंग एवम प्रकार । हिंदी व्याकरण।

1. श्रृंगार रस - जब किसी सहृदय के हृदय में रति नामक स्थायी भाव का विभाव,अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो श्रंगार रस की उत्पत्ति होती है।                            अथवा श्रृंगार रस को "रसों का राजा यानी कि रसराज " कहा जाता है । यह रसों में सर्वप्रथम स्थान रखता है ।  अर्थात जहां पर काव्य में मिलनसारिता या वियोग ,विरह का भाव प्रदर्शित होता है वहां पर श्रृंगार रस होता है। श्रृंगार रस के दो भेद हैं -   संयोग श्रृंगार रस और वियोग श्रृंगार रस ।   i)  संयोग श्रृंगार रस- जहाँ पर नायक और नायिका के मिलन या संयोग का वर्णन हो, वहां पर संयोग श्रृंगार रस होता है ।    उदाहरण- 1. राम को रूप निहारति जानकी                      कंगन के नग की परछाई ।             ...

रस के भेद या प्रकार कितने होते है। , रस , हिंदी व्याकरण

रस के भेद (प्रकार) -  रस के 10 भेद होते हैं। भरत मुनि  ने नाटय शास्त्रों में रसों की संख्या 9 बताई है वात्सल्य को 10 वां एवं भक्ति को 11 वां रस माना है। क्रमांक       रस का नाम            स्थायी              भाव 1. 2. 3. 4. 5. 6. 7. 8. 9. 10. 11. श्रृंगार रस  करुण रस   हास्य रस  वीर रस  रौद्र रस  अद्भुत रस  भयानक रस   वीभत्स रस   शांत रस और   वात्सल्य  रस भक्ति रस रति (प्रेम)  शोक  हास (हंसी)  उत्साह  क्रोध  विस्मय (आश्चर्य)  भय  जुगुप्सा (घृणा)  निर्वेद (वैराग्य)  वत्सल (ममत्व)  ईश प्रेम प्रश्न - स्थायी भाव एवम संचारी भाव में अंतर।  स्थायी भाव एवम संचारी भाव में निम्न अंतर है- 1.   स्थाई भाव सह्रदय के हृदय में स्थाई रूप से विद्यमान होते हैं,                      ...

रस के अंग कितने होते है। , परिभाषा , हिंदी व्याकरण

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रस के अंग कितने होते है। रस के अंगों के नाम लिखिए। रस के अंग -  रस के चार अंग होते हैं  स्थाई भाव  विभाव  अनुभाव एवं  संचारी भाव( व्यभिचारी भाव) 1 . स्थाई भाव -  वे भाव जो किसी सहृदय के हृदय में स्थायी रूप से विद्यमान होते हैं, स्थायी भाव कहलाते हैं।  इनकी संख्या 10 है।   2 . विभाव -  स्थायी भावों को जागृत करने वाले कारक को या कारकों को विभाव कहते हैं । विभाव दो प्रकार के होते हैं -  आलंबन विभाव और  उद्दीपन विभाव  a. आलंबन विभाव -  जिसके कारण सह्रदय के ह्रदय में भाव जागृत होते हैं,उसे आलंबन विभाव कहते हैं । आलंबन विभाव दो प्रकार के होते हैं -  आश्रय और विषय  i. आश्रय -  जिस व्यक्ति के हृदय में स्थायी भाव जागृत होते हैं उसे आश्रय कहते हैं।  ii. विषय -  जिस व्यक्ति या वस्तु के कारण आश्रय के हृदय में स्थायी भाव जागृत होते हैं, उसे विषय कहते हैं।  b. उद्दीपन विभाव - आलंबन विभाव द्वारा जागृत कारकों को और अधिक उद्दीप्त करने वाले या तेज करने वाले कारक को उद्दीपन विभाव कहते हैं। 3. अनु...

रस किसे कहते है।

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रस किसे कहते है। रस क्या है? रस की परिभाषा । Ras Kise Khate hai. | What is Rasa. | Definition of Rasa.| Ras ki paribhasha. |  Ras kya hai? परिभाषा-   किसी काव्य को पढ़ने,सुनने अथवा देखने में पाठक, श्रोता अथवा दर्शक को जिस आनंद की अनुभूति होती है उसे रस कहते है। रस का शाब्दिक अर्थ होता है -  आनंद या मजे की प्राप्ति यह परिभाषा जो आपने ऊपर पढ़ी है यह रस की प्रचलित परिभाषा है,लेकिन आज कुछ नया सीखो👌 यह परिभाषा जो कि नीचे दी गयी है यदि आपको याद है तो पूरे के पूरे दस रसों की परिभाषा आप बहुत ही आसानी से याद कर सकेंगे।  दूसरे शब्दों में   "जब किसी सह्रदय के ह्रदय में स्थायी भाव का विभाव, अनुभाव एवम संचारी भाव के साथ संयोग होता है तो रस की उत्पत्ति या अभिव्यंजना होती हैै ।" My Youtube Channel Download PDF (रस) रस के अंग watch on youtube ( रस की परिभाषा) download pdf करुण रस ........................................... रस की परिभाषा ............................................ रस के अंग ............................................ Download pdf (रस के...