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प्रेमचंद की ‘सद्गति’ कहानी की समीक्षा | कथानक, पात्र, भाषा और उद्देश्य || प्रेमचन्द की कहानी की समीक्षा || प्रेम मञ्जूषा ||

प्रेमचंद की ‘सद्गति’ : कहानी की समीक्षा   ✍️ परिचय हिंदी साहित्य में मुंशी प्रेमचंद का नाम सामाजिक यथार्थवाद और मानवीय करुणा के लिए अमर है। उनकी कहानियाँ सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं , बल्कि समाज की गहरी जड़ों में छिपे अन्याय और शोषण को सामने लाती हैं। ‘ सद्गति’ प्रेमचंद की ऐसी ही कालजयी कहानी है , जो जातिगत भेदभाव , पाखंड और अमानवीयता पर तीखा प्रहार करती है। ______________________________________________________________________________   1. कथानक ( Plot) कहानी का कथानक सीधा , छोटा और प्रभावशाली है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे गरीब चमार दुखी अपनी बेटी की शादी के लिए पंडित से मुहूर्त निकालने जाता है और सेवा के नाम पर पंडित उससे कठिन परिश्रम करवाता है। थकावट और भूख-प्यास से दुखी वहीं दम तोड़ देता है। अंत में पंडित और उसकी पत्नी दुखी के शव से निजात पाने की चिंता में पड़ जाते हैं। 👉 यह कथानक शोषण , अंधविश्वास और सामाजिक असमानता को तीव्र रूप से उजागर करता है।   2. पात्र एवं चरित्र - चित्रण  ( Characters)...