जीप पर सवार इल्लियाँ व्यंग्य की समीक्षा – Sharad Joshi की तीखी सामाजिक दृष्टि || शरद जोशी का व्यंग्य “जीप पर सवार इल्लियाँ” : कथ्य, भाषा और सामाजिक व्यंग्य की समीक्षा || “जीप पर सवार इल्लियाँ” व्यंग्य का विश्लेषण – समाज और व्यवस्था पर शरद जोशी का कटाक्ष ||
“जीप पर सवार इल्लियाँ” व्यंग्य समीक्षा शरद जोशी के प्रसिद्ध व्यंग्य “ जीप पर सवार इल्लियाँ” में लेखक ने समाज और व्यवस्था की विडंबनाओं पर तीखा प्रहार किया है। 1. कथ्य / विषयवस्तु इस व्यंग्य में लेखक ने सत्ता और व्यवस्था में बैठे लोगों की स्वार्थपरता तथा अवसरवादिता को उजागर किया है। “इल्लियाँ” उन लोगों का प्रतीक हैं जो किसी भी व्यवस्था या साधन पर सवार होकर अपने स्वार्थ पूरे करते हैं और समाज को नुकसान पहुँचाते हैं। 2. व्यंग्य का उद्देश्य लेखक का उद्देश्य समाज और प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार , स्वार्थ और नैतिक पतन पर कटाक्ष करना है। वह यह दिखाना चाहता है कि किस प्रकार छोटे-छोटे स्वार्थी लोग व्यवस्था का उपयोग अपने लाभ के लिए करते हैं। 3. शैली और भाषा लेखक की भाषा सरल , चुटीली और तीखी है। छोटे-छोटे वाक्य , रोचक उपमाएँ और प्रतीकों का प्रयोग व्यंग्य को प्रभावशाली बनाता है। “इल्लियाँ” और “जीप” जैसे प्रतीकों के माध्यम से गहरी बात कही गई है। 4. विडंबना और हास्य तत्व व्यंग्य में हास्य के साथ तीखी विडंबना भी दिखाई देती है। पाठक को हँसी भी आती...